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Aapatkalin Sangharsh Gatha

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Author: Mohanlal Rustgi
ISBN: 978-93-86199-63-8
Language: hindi
Publisher: SURUCHI PRAKASHAN
Edition: First Edition
Pages: 52
Binding Style: Paper Bind
30 30

<h3 style="text-align: center;"><strong>आपातकालीन संघर्ष गाथा (संक्षिप्त जानकारी)</strong></h3>
<p> </p>
<p style="text-align: justify;">    25 जून 1975 भोर की पहली किरण अभी फूटी भी नहीं थी कि पूरे देश में सन्नाटा पसर गया। प्रधानमंत्री श्रीमती इन्दिरा गांधी ने अपनी कुर्सी की रक्षा करने के लिए लोकतंत्र की हत्या कर देश भर में आपात्काल थोप दिया। रातों-रात देश के शीर्षस्थ नेताओं (यथा लोकनायक जयप्रकाश नारायण, मोरारजी भाई देसाई, अटल बिहारी वाजपेयी) एवं हजारों कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार करके जेलों में ठूँस दिया गया। कोई स्पष्टीकरण नहीं, कोई पूछताछ नहीं, कोई नोटिस नहीं, कोई वकील नहीं, कोई दलील नहीं, केवल मीसा और डी.आई.आर. के अन्तर्गत ही गिरफ्तार कर लिया गया।</p>
<p style="text-align: justify;">   à¤•à¤·à¥à¤Ÿ-यातना, अन्याय व अंधकार के मध्य रा.स्व.संघ उस समय आशा की किरण बन कर उभरा। गिरफ्तार लोगों के परिवारों के सामने आजीविका का भयावह प्रश्न खड़ा हो गया। संघ के कार्यकर्ताओं ने घर घर जाकर स्थिति सँभाली। पीड़ित परिवारों की उन्होंने सारी व्यवस्थाएँ कीं। पूरे देश में आपात्काल के विरोध में सत्याग्रह किया गया। ऐसे अनेक प्रसंगो का उल्लेख मोहनलाल रूस्तगी जी ने अपनी इस लघु पुस्तिका में किया है। सुधी पाठक आपात्काल के उस भयावह समय में हुये भीषण अत्याचारों से अवगत होंगे। इसके साथ ही जिन देशभक्त लोगों ने क्रूर शासनतंत्र की ज्यादतियों को निडरतापूर्वक झेला और लोकतंत्र की रक्षा हेतु अनगिनत कष्ट सहे, उनसे प्रेरणा लेकर अपने जीवन को त्यागमय, संघर्षमय बनाकर सार्थक करेंगे।</p>

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